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mahabharat 7.159.14: द्विजश्रेष्ठ! कर्णपर, कृपाचार्य, द्रोणाचार्य, मद्रराज शल्य तथा शकुनि, आप पर बहुत बड़ा उत्तरदायित्व डाला गया है; आप खुश रहें। 14॥   |   mahabharat अध्याय 7.159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.159.14 
त्वयि कर्णे कृपे द्रोणे मद्रराजेऽथ सौबले।
महत् कार्यं समासक्तं प्रसीद द्विजसत्तम॥ १४॥
 
 
अनुवाद
द्विजश्रेष्ठ! कर्णपर, कृपाचार्य, द्रोणाचार्य, मद्रराज शल्य तथा शकुनि, आप पर बहुत बड़ा उत्तरदायित्व डाला गया है; आप खुश रहें। 14॥
 
Dwijshreshtha! A great responsibility has been placed on you, Karnapar, Kripacharya, Dronacharya, Madraraja Shalya and Shakuni; May you be happy. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)