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mahabharat 7.159.10: संजय कहते हैं - हे राजन! इस प्रकार ऊपर उठते हुए अश्वत्थामा को स्वयं महाबली राजा दुर्योधन तथा पुरुषोत्तम कृपाचार्य ने रोक लिया।   |   mahabharat अध्याय 7.159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.159.10 
संजय उवाच
तमुद्यतं तु वेगेन राजा दुर्योधन: स्वयम्।
न्यवारयन्महातेजा: कृपश्च द्विपदां वर:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! इस प्रकार ऊपर उठते हुए अश्वत्थामा को स्वयं महाबली राजा दुर्योधन तथा पुरुषोत्तम कृपाचार्य ने रोक लिया।
 
Sanjaya says - O King! Ashvatthama, who was rising up in this manner, was stopped by the mighty king Duryodhana himself and the best of men, Kripacharya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)