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mahabharat 7.158.70: द्विजधाम! मैं रणभूमि में दुर्योधन के हित के लिए यथाशक्ति उन लोगों से युद्ध करने का प्रयत्न करूँगा जिन्हें तुम सदैव बलवान मानते हो। विजय भगवान के अधीन है। 70॥   |   mahabharat अध्याय 7.158: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत, कृपाचार्यद्वारा कर्णको फटकारना तथा कर्णद्वारा कृपाचार्यका अपमान   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 158: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत, कृपाचार्यद्वारा कर्णको फटकारना तथा कर्णद्वारा कृपाचार्यका अपमान  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  7.158.70 
यस्तान् बलवतो नित्यं मन्यसे त्वं द्विजाधम।
यतिष्येऽहं यथाशक्ति योद्‍धुं तै: सह संयुगे।
दुर्योधनहितार्थाय ‘जयो दैवे प्रतिष्ठित:’॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
द्विजधाम! मैं रणभूमि में दुर्योधन के हित के लिए यथाशक्ति उन लोगों से युद्ध करने का प्रयत्न करूँगा जिन्हें तुम सदैव बलवान मानते हो। विजय भगवान के अधीन है। 70॥
 
‘Dwijadham! I will try to fight as much as I can for the welfare of Duryodhana in the battlefield with those whom you always consider strong. Victory is under the control of God. 70॥
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि घटोत्कचवधपर्वणि रात्रियुद्धे कृपकर्ण-वाक्येऽष्टपञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १५८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत घटोत्कचवधपर्वमें रात्रियुद्धके प्रसंगमें कृपाचार्य और कर्णका विवादविषयक एक सौ अट्ठावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)