Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.158.65-66: विकर्ण, चित्रसेन, बाह्लीक, जयद्रथ, भूरिश्रवा, जय, जलसंध, सुदक्षिण, शल, सारथियों में सर्वश्रेष्ठ और शक्तिशाली भगदत्त - ये और कई अन्य राजा देवताओं के लिए भी अत्यंत अजेय थे। 65-66॥   |   mahabharat अध्याय 7.158: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत, कृपाचार्यद्वारा कर्णको फटकारना तथा कर्णद्वारा कृपाचार्यका अपमान   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 158: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत, कृपाचार्यद्वारा कर्णको फटकारना तथा कर्णद्वारा कृपाचार्यका अपमान  »  श्लोक 65-66
 
 
श्लोक  7.158.65-66 
विकर्णश्चित्रसेनश्च बाह्लीकोऽथ जयद्रथ:।
भूरिश्रवा जयश्चैव जलसंध: सुदक्षिण:॥ ६५॥
शलश्च रथिनां श्रेष्ठो भगदत्तश्च वीर्यवान्।
एते चान्ये च राजानो देवैरपि सुदुर्जया:॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
विकर्ण, चित्रसेन, बाह्लीक, जयद्रथ, भूरिश्रवा, जय, जलसंध, सुदक्षिण, शल, सारथियों में सर्वश्रेष्ठ और शक्तिशाली भगदत्त - ये और कई अन्य राजा देवताओं के लिए भी अत्यंत अजेय थे। 65-66॥
 
‘Vikarna, Chitrasen, Bahlika, Jayadratha, Bhurishrava, Jai, Jalsandha, Sudakshin, Shala, the best among charioteers and the mighty Bhagadatta – these and many other kings were extremely insurmountable even for the gods. 65-66॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)