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mahabharat 7.158.58-59h: ब्रह्मन्! दुर्मते! तुम युद्धस्थल में सम्पूर्ण कौरव सेना को भयभीत करने के लिए पाण्डवों का गुणगान करना चाहते हो, मैं जो सत्य बात तुमसे कह रहा हूँ, उसे सुनो। 58 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.158: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत, कृपाचार्यद्वारा कर्णको फटकारना तथा कर्णद्वारा कृपाचार्यका अपमान   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 158: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत, कृपाचार्यद्वारा कर्णको फटकारना तथा कर्णद्वारा कृपाचार्यका अपमान  »  श्लोक 58-59h
 
 
श्लोक  7.158.58-59h 
यच्चापि पाण्डवान् विप्र स्तोतुमिच्छसि संयुगे।
भीषयन् सर्वसैन्यानि कौरवेयाणि दुर्मते॥ ५८॥
अत्रापि शृणु मे वाक्यं यथावद् ब्रुवतो द्विज।
 
 
अनुवाद
ब्रह्मन्! दुर्मते! तुम युद्धस्थल में सम्पूर्ण कौरव सेना को भयभीत करने के लिए पाण्डवों का गुणगान करना चाहते हो, मैं जो सत्य बात तुमसे कह रहा हूँ, उसे सुनो। 58 1/2॥
 
Brahman! Durmate! You want to sing the praises of the Pandavas to frighten the entire Kaurava army in the battlefield, listen to what I am telling you about the truth. 58 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)