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mahabharat 7.158.51-52: तथापि, मैं इन्द्र द्वारा दी गई शक्ति से कुन्तीपुत्रों को जीत लूँगा। ब्रह्मन्! इन्द्र ने मुझे यह अमोघ शक्ति दी है; इसके द्वारा मैं युद्ध में बुद्धिमान् अर्जुन को अवश्य मार डालूँगा। 51-52॥   |   mahabharat अध्याय 7.158: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत, कृपाचार्यद्वारा कर्णको फटकारना तथा कर्णद्वारा कृपाचार्यका अपमान   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 158: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत, कृपाचार्यद्वारा कर्णको फटकारना तथा कर्णद्वारा कृपाचार्यका अपमान  »  श्लोक 51-52
 
 
श्लोक  7.158.51-52 
तथापि पार्थाञ्जेष्यामि शक्त्या वासवदत्तया॥ ५१॥
मम ह्यमोघा दत्तेयं शक्ति: शक्रेण वै द्विज।
एतया निहनिष्यामि सव्यसाचिनमाहवे॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
तथापि, मैं इन्द्र द्वारा दी गई शक्ति से कुन्तीपुत्रों को जीत लूँगा। ब्रह्मन्! इन्द्र ने मुझे यह अमोघ शक्ति दी है; इसके द्वारा मैं युद्ध में बुद्धिमान् अर्जुन को अवश्य मार डालूँगा। 51-52॥
 
However, I will conquer the sons of Kunti with the power given by Indra. Brahman! Indra has given me this infallible power; Through this I will definitely kill the wise Arjuna in the battle. 51-52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)