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mahabharat 7.158.48-49h: संजय कहते हैं: हे भरतश्रेष्ठ! उनके ऐसा कहने पर राधापुत्र कर्ण जोर से हँसा और उस समय शरद्वानपुत्र गुरु कृपाचार्य से इस प्रकार बोला:॥48 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.158: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत, कृपाचार्यद्वारा कर्णको फटकारना तथा कर्णद्वारा कृपाचार्यका अपमान   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 158: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत, कृपाचार्यद्वारा कर्णको फटकारना तथा कर्णद्वारा कृपाचार्यका अपमान  »  श्लोक 48-49h
 
 
श्लोक  7.158.48-49h 
संजय उवाच
एवमुक्तस्तु राधेय: प्रहसन् भरतर्षभ॥ ४८॥
अब्रवीच्च तदा कर्णो गुरुं शारद्वतं कृपम्।
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं: हे भरतश्रेष्ठ! उनके ऐसा कहने पर राधापुत्र कर्ण जोर से हँसा और उस समय शरद्वानपुत्र गुरु कृपाचार्य से इस प्रकार बोला:॥48 1/2॥
 
Sanjaya says: O best of the Bharatas! Upon his saying this, Radha's son Karna laughed out loud and at that time spoke to Guru Kripacharya, son of Sharadwan, thus:॥ 48 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)