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mahabharat 7.158.38-40: उनके रिश्तेदार भी इंद्र के समान पराक्रमी, उनसे स्नेह करने वाले और आक्रमण करने में कुशल थे, जिनके नाम इस प्रकार हैं- धृष्टद्युम्न, शिखंडी, दुर्मुखपुत्र जनमेजय, चंद्रसेन, रुद्रसेन, कीर्तिधर्मा, ध्रुव, धर, वसुचंद्र, दामचंद्र, सिंहचंद्र, सुतेजन, द्रुपद के पुत्र और महान ज्योतिषी द्रुपद। 38-40॥   |   mahabharat अध्याय 7.158: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत, कृपाचार्यद्वारा कर्णको फटकारना तथा कर्णद्वारा कृपाचार्यका अपमान   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 158: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत, कृपाचार्यद्वारा कर्णको फटकारना तथा कर्णद्वारा कृपाचार्यका अपमान  »  श्लोक 38-40
 
 
श्लोक  7.158.38-40 
सम्बन्धिनश्चेन्द्रवीर्या: स्वनुरक्ता: प्रहारिण:॥ ३८॥
धृष्टद्युम्न: शिखण्डी च दौर्मुखिर्जनमेजय:।
चन्द्रसेनो रुद्रसेन: कीर्तिधर्मा ध्रुवो धर:॥ ३९॥
वसुचन्द्रो दामचन्द्र: सिंहचन्द्र: सुतेजन:।
द्रुपदस्य तथा पुत्रा द्रुपदश्च महास्त्रवित्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
उनके रिश्तेदार भी इंद्र के समान पराक्रमी, उनसे स्नेह करने वाले और आक्रमण करने में कुशल थे, जिनके नाम इस प्रकार हैं- धृष्टद्युम्न, शिखंडी, दुर्मुखपुत्र जनमेजय, चंद्रसेन, रुद्रसेन, कीर्तिधर्मा, ध्रुव, धर, वसुचंद्र, दामचंद्र, सिंहचंद्र, सुतेजन, द्रुपद के पुत्र और महान ज्योतिषी द्रुपद। 38-40॥
 
His relatives are also as mighty as Indra, fond of him and skilled in attacking, whose names are as follows - Dhrishtadyumna, Shikhandi, Durmukhputra Janamejaya, Chandrasen, Rudrasen, Kirtidharma, Dhruva, Dhar, Vasuchandra, Damachandra, Simhachandra, Sutejan, the sons of Drupada and the great astrologer Drupada. 38-40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)