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mahabharat 7.158.37-38h: उसके बलवान भाइयों ने भी सब प्रकार के अस्त्र-शस्त्र चलाने की कला में परिश्रम किया है। वे गुरुभक्त, विद्वान, धर्मनिष्ठ और यशस्वी हैं। 37 1/2।   |   mahabharat अध्याय 7.158: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत, कृपाचार्यद्वारा कर्णको फटकारना तथा कर्णद्वारा कृपाचार्यका अपमान   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 158: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत, कृपाचार्यद्वारा कर्णको फटकारना तथा कर्णद्वारा कृपाचार्यका अपमान  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  7.158.37-38h 
भ्रातरश्चास्य बलिन: सर्वास्त्रेषु कृतश्रमा:॥ ३७॥
गुरुवृत्तिरता: प्राज्ञा धर्मनित्या यशस्विन:।
 
 
अनुवाद
उसके बलवान भाइयों ने भी सब प्रकार के अस्त्र-शस्त्र चलाने की कला में परिश्रम किया है। वे गुरुभक्त, विद्वान, धर्मनिष्ठ और यशस्वी हैं। 37 1/2।
 
His strong brothers have also worked hard in the art of using all kinds of weapons. They are devoted to their Guru, learned, devoted to Dharma and famous. 37 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)