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mahabharat 7.158.35: यदि देवता, गन्धर्व, यक्ष, मनुष्य, सर्प और राक्षस भी युद्ध के लिए कवच धारण करके आएँ, तो भी वे रणभूमि में श्रीकृष्ण और अर्जुन को नहीं हरा सकते॥35॥   |   mahabharat अध्याय 7.158: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत, कृपाचार्यद्वारा कर्णको फटकारना तथा कर्णद्वारा कृपाचार्यका अपमान   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 158: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत, कृपाचार्यद्वारा कर्णको फटकारना तथा कर्णद्वारा कृपाचार्यका अपमान  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.158.35 
देवगन्धर्वयक्षाणां मनुष्योरगरक्षसाम्।
दंशितानामपि रणे अजेयौ कृष्णपाण्डवौ॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
यदि देवता, गन्धर्व, यक्ष, मनुष्य, सर्प और राक्षस भी युद्ध के लिए कवच धारण करके आएँ, तो भी वे रणभूमि में श्रीकृष्ण और अर्जुन को नहीं हरा सकते॥35॥
 
If gods, Gandharvas, Yakshas, ​​humans, snakes and even demons come dressed in armor for war, then even they cannot defeat Shri Krishna and Arjun in the battlefield. 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)