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mahabharat 7.158.26-27h: यदि युद्धभूमि में भारी बोझ ढोने वाले वीर योद्धा युद्ध के मुहाने पर अपनी ही प्रशंसा के शब्द बोलते हैं, तो मैं उनमें कोई दोष नहीं देखता।   |   mahabharat अध्याय 7.158: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत, कृपाचार्यद्वारा कर्णको फटकारना तथा कर्णद्वारा कृपाचार्यका अपमान   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 158: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत, कृपाचार्यद्वारा कर्णको फटकारना तथा कर्णद्वारा कृपाचार्यका अपमान  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  7.158.26-27h 
दोषमत्र न पश्यामि शूराणां रणमूर्धनि॥ २६॥
तत्तद् विकत्थमानानां भारं चोद्वहतां मृधे।
 
 
अनुवाद
यदि युद्धभूमि में भारी बोझ ढोने वाले वीर योद्धा युद्ध के मुहाने पर अपनी ही प्रशंसा के शब्द बोलते हैं, तो मैं उनमें कोई दोष नहीं देखता।
 
If valiant warriors carrying great burdens on the battlefield speak only words of praise for themselves at the mouth of the battle, I find no fault in them. 26 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)