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mahabharat 7.158.25-26h: ‘वीर योद्धा वर्षाऋतु में बादलों के समान सदैव गर्जना करते हैं और ऋतु आने पर बोए गए बीजों के समान शीघ्र ही फल देते हैं।॥25 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.158: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत, कृपाचार्यद्वारा कर्णको फटकारना तथा कर्णद्वारा कृपाचार्यका अपमान   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 158: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत, कृपाचार्यद्वारा कर्णको फटकारना तथा कर्णद्वारा कृपाचार्यका अपमान  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  7.158.25-26h 
शूरा गर्जन्ति सततं प्रावृषीव बलाहका:॥ २५॥
फलं चाशु प्रयच्छन्ति बीजमुप्तमृताविव।
 
 
अनुवाद
‘वीर योद्धा वर्षाऋतु में बादलों के समान सदैव गर्जना करते हैं और ऋतु आने पर बोए गए बीजों के समान शीघ्र ही फल देते हैं।॥25 1/2॥
 
‘Valiant warriors always roar like the clouds during the rainy season and also bear fruits soon like the seeds sown in the right season.॥ 25 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)