Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.158.2-3: हे मित्र-प्रेमी कर्ण! मित्रों के लिए यही उचित समय है कि वे अपना कर्तव्य निभाएँ। क्रोध में भरे हुए पांचाल, मत्स्य, केकय और पांडव योद्धा फुंफकारते हुए सर्पों के समान भयंकर हो गए हैं। आज तुम युद्धभूमि में चारों ओर से घिरे हुए मेरे सभी योद्धाओं की रक्षा करो। | mahabharat अध्याय 7.158: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत, कृपाचार्यद्वारा कर्णको फटकारना तथा कर्णद्वारा कृपाचार्यका अपमान । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे मित्र-प्रेमी कर्ण! मित्रों के लिए यही उचित समय है कि वे अपना कर्तव्य निभाएँ। क्रोध में भरे हुए पांचाल, मत्स्य, केकय और पांडव योद्धा फुंफकारते हुए सर्पों के समान भयंकर हो गए हैं। आज तुम युद्धभूमि में चारों ओर से घिरे हुए मेरे सभी योद्धाओं की रक्षा करो।
Friend-loving Karna! This is the right time for friends to perform their duties. The Panchala, Matsya, Kekaya and Pandava warriors filled with anger have become fierce like hissing snakes. Today, you protect all my warriors in the battlefield who are surrounded by them from all sides.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥