Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.157.5: सोमदत्त को सात्यकि की सहायता के लिए आते देख भीमसेन ने उसे चट्टान पर तीखे दस स्वर्ण पंख वाले बाणों से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.157.5 
तं दृष्ट्वा समुपायान्तं रुक्मपुङ्खै: शिलाशितै:।
दशभि: सात्वतस्यार्थे भीमो विव्याध सायकै:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
सोमदत्त को सात्यकि की सहायता के लिए आते देख भीमसेन ने उसे चट्टान पर तीखे दस स्वर्ण पंख वाले बाणों से घायल कर दिया।
 
Seeing Somadatta coming to Satyaki's aid, Bhimasena wounded him with ten golden-feathered arrows sharpened on a rock.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)