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mahabharat 7.157.48: उस समय अंधकार और निद्रा से पीड़ित, मुकुटधारी अर्जुन द्वारा आक्रमण किये जाने पर कौरव सेना पुनः तितर-बितर हो गयी।   |   mahabharat अध्याय 7.157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  7.157.48 
तत: सा भारती सेना वध्यमाना किरीटिना।
तमसा निद्रया चैव पुनरेव व्यदीर्यत॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
उस समय अंधकार और निद्रा से पीड़ित, मुकुटधारी अर्जुन द्वारा आक्रमण किये जाने पर कौरव सेना पुनः तितर-बितर हो गयी।
 
At that time the Kaurava army, being attacked by crown-wearing Arjuna, afflicted by darkness and sleep, again dispersed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)