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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  7.157.47 
केकया: सृञ्जयाश्चैव पञ्चालाश्च महौजस:।
अन्वगच्छन् महाराज मत्स्याश्च सह सात्वतै:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उस समय केकय, संजय, शक्तिशाली पांचाल, मत्स्य और यादव सैनिक भी उनके पीछे आये। 47.
 
Maharaj! At that time Kekaya, Sanjaya, the mighty Panchala, Matsya and the Yadava soldiers also followed them. 47.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)