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mahabharat 7.157.44: द्रोणाचार्य के प्रहार से पांचाल सैनिक भीमसेन और महात्मा अर्जुन के सामने ही भयभीत होकर भागने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  7.157.44 
ते हन्यमाना द्रोणेन पञ्चाला: प्राद्रवन् भयात्।
पश्यतो भीमसेनस्य पार्थस्य च महात्मन:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य के प्रहार से पांचाल सैनिक भीमसेन और महात्मा अर्जुन के सामने ही भयभीत होकर भागने लगे।
 
After being struck by Dronacharya, the Panchala soldiers began running away in fear, right in front of Bhimasena and Mahatma Arjun.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)