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mahabharat 7.157.43: उस समय द्रोणाचार्य ने कुन्तीपुत्र का सामना करना छोड़कर क्रोध से लाल-लाल आँखें करके तथा वायव्यास्त्र का प्रयोग करके द्रुपद की सेना का विनाश करना आरम्भ कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  7.157.43 
तत: प्रमुच्य कौन्तेयं द्रोणो द्रुपदवाहिनीम्।
व्यधमत् क्रोधताम्राक्षो वायव्यास्त्रेण भारत॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
उस समय द्रोणाचार्य ने कुन्तीपुत्र का सामना करना छोड़कर क्रोध से लाल-लाल आँखें करके तथा वायव्यास्त्र का प्रयोग करके द्रुपद की सेना का विनाश करना आरम्भ कर दिया।
 
At that time, Dronacharya, giving up facing Kunti's son, began to destroy Drupada's army with his eyes turning red with anger and using Vayavyastra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)