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mahabharat 7.157.42: तत्पश्चात् प्रधान सैनिक द्रोणाचार्य और युधिष्ठिर की स्तुति करने लगे, जो समस्त युद्धकलाओं में निपुण, महाधनुर्धर और पुरुषों में श्रेष्ठ थे ॥42॥   |   mahabharat अध्याय 7.157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  7.157.42 
तत: सैनिकमुख्यास्ते प्रशशंसुर्नरर्षभौ।
द्रोणपार्थौ महेष्वासौ सर्वयुद्धविशारदौ॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् प्रधान सैनिक द्रोणाचार्य और युधिष्ठिर की स्तुति करने लगे, जो समस्त युद्धकलाओं में निपुण, महाधनुर्धर और पुरुषों में श्रेष्ठ थे ॥42॥
 
Thereafter, the chief soldiers started praising Dronacharya and Yudhishthira, who were expert in all the arts of war, the great archer, the best of men. 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)