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mahabharat 7.157.41: राजेंद्र! ब्रह्मास्त्र को तैयार देखकर कुन्तीकुमार युधिष्ठिर ने ब्रह्मास्त्र से ही उस अस्त्र को नष्ट कर दिया। 41॥   |   mahabharat अध्याय 7.157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  7.157.41 
ब्रह्मास्त्रमुद्यतं दृष्ट्वा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिर:।
ब्रह्मास्त्रेणैव राजेन्द्र तदस्त्रं प्रत्यवारयत्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
राजेंद्र! ब्रह्मास्त्र को तैयार देखकर कुन्तीकुमार युधिष्ठिर ने ब्रह्मास्त्र से ही उस अस्त्र को नष्ट कर दिया। 41॥
 
Rajendra! Seeing Brahmastra ready, Kuntikumar Yudhishthir destroyed that weapon with Brahmastra itself. 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)