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mahabharat 7.157.4: तत्पश्चात् विजय चाहने वाले आपके सैनिकों और शत्रुओं के बीच बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया॥4॥   |   mahabharat अध्याय 7.157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.157.4 
तत: समभवद् युद्धमतीव भयवर्धनम्।
त्वदीयानां परेषां च घोरं विजयकाङ्क्षिणाम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् विजय चाहने वाले आपके सैनिकों और शत्रुओं के बीच बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया॥4॥
 
Then a terrible and fierce battle broke out between your soldiers who desired victory and those of the enemy. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)