श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय  »  श्लोक 36-37
 
 
श्लोक  7.157.36-37 
सत्यां चिकीर्षमाणस्तु प्रतिज्ञां कुम्भसम्भव:॥ ३६॥
प्रादुश्चक्रेऽस्त्रमैन्द्रं वै प्राजापत्यं च भारत।
जिघांसुर्धर्मतनयं तव पुत्रहिते रत:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
धर्मपुत्र युधिष्ठिरको मारनेकी अपनी प्रतिज्ञा पूरी करनेकी इच्छासे द्रोणाचार्यने उसपर ऐन्द्र और प्रजापत्य नामक अस्त्रोंका प्रयोग किया ॥36-37॥
 
India Dronacharya, wishing to fulfill his promise to kill Dharma's son Yudhishthira, used the weapons named Aindra and Prajapatya on him. 36-37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)