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mahabharat 7.157.3: भरत! सात्यकि को युद्धभूमि में देखकर सोमदत्त पुनः क्रोधित हो उठा और उसने बाणों की भारी वर्षा से सात्यकि को ढक दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.157.3 
सोमदत्त: पुन: क्रुद्धो दृष्ट्वा सात्यकिमाहवे।
महता शरवर्षेणच्छादयामास भारत॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भरत! सात्यकि को युद्धभूमि में देखकर सोमदत्त पुनः क्रोधित हो उठा और उसने बाणों की भारी वर्षा से सात्यकि को ढक दिया।
 
Bhaarata! On seeing Satyaki on the battlefield, Somadatta again became furious and covered Satyaki with a heavy shower of arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)