Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.157.25-26h: जैसे वर्षा के वेग से पर्वत घायल हो जाता है, उसी प्रकार उनके बाणों से घायल होकर महाबली भीमसेन ने अपने पाँच बाणों से उन पाँचों महारथियों को मार डाला। | mahabharat अध्याय 7.157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स ताडॺमानो नाराचैर्वृष्टिवेगैरिवाचल:॥ २५॥
जघान पञ्चभिर्बाणै: पञ्चैवातिरथान् बली।
अनुवाद
जैसे वर्षा के वेग से पर्वत घायल हो जाता है, उसी प्रकार उनके बाणों से घायल होकर महाबली भीमसेन ने अपने पाँच बाणों से उन पाँचों महारथियों को मार डाला।
Just as a mountain is hurt by the force of rain, similarly, being wounded by their arrows, the powerful Bhimasena killed those five great warriors with his five arrows. 25 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥