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mahabharat 7.157.19-20h: उन बाणों से घायल होकर आपके पुत्र अपने प्राण गँवा बैठे और अपने रथों से गिर पड़े, वे उसी प्रकार दुर्बल हो गए जैसे तेज हवा से पर्वत शिखर से उखड़ गए वृक्ष।   |   mahabharat अध्याय 7.157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  7.157.19-20h 
ते विद्धा व्यसव: पेतु: स्यन्दनेभ्यो हतौजस:॥ १९॥
चण्डवातप्रभग्नास्तु पर्वताग्रान्महीरुहा:।
 
 
अनुवाद
उन बाणों से घायल होकर आपके पुत्र अपने प्राण गँवा बैठे और अपने रथों से गिर पड़े, वे उसी प्रकार दुर्बल हो गए जैसे तेज हवा से पर्वत शिखर से उखड़ गए वृक्ष।
 
Wounded by those arrows, your sons lost their lives and fell down from their chariots, weakened like trees uprooted from a mountain peak by a strong wind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)