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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  7.157.17-18h 
नागदत्तो दृढरथो महाबाहुरयोभुज:॥ १७॥
दृढ: सुहस्तो विरजा: प्रमाथ्युग्रोऽनुयाय्यपि।
 
 
अनुवाद
उनके नाम इस प्रकार हैं- नागदत्त, दुर्धरथ (दृढ़ार्थाश्रय), महाबाहु, अयोभुज (अयोबाहु), दुर्ध (दृढ़क्षत्र), सुहस्त, विरजा, प्रमथि, उग्र (उग्रश्रवा) और अनुयायी (अग्रयायी)। 17 1/2॥
 
Their names are as follows - Nagadatta, Durdharath (Dridharthashray), Mahabahu, Ayobhuj (Ayobahu), Durdha (Dridhakshatra), Suhast, Virja, Pramathi, Ugra (Ugrashrava) and Follower (Agrayayi). 17 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)