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mahabharat 7.157.16-17h: नरश्रेष्ठ! वीर बाह्लीक के मर जाने पर श्री रामचन्द्रजी के समान पराक्रमी आपके दस पुत्र भीमसेन को कष्ट देने लगे॥16 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  7.157.16-17h 
तस्मिन् विनिहते वीरे बाह्लीके पुरुषर्षभ॥ १६॥
पुत्रास्तेऽभ्यर्दयन् भीमं दश दाशरथे: समा:।
 
 
अनुवाद
नरश्रेष्ठ! वीर बाह्लीक के मर जाने पर श्री रामचन्द्रजी के समान पराक्रमी आपके दस पुत्र भीमसेन को कष्ट देने लगे॥16 1/2॥
 
Narashrestha! After the death of the brave Bahlika, your ten sons, as mighty as Shri Ramchandraji, started tormenting Bhimsen. 16 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)