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mahabharat 7.157.12-13h: भीमसेन ने सात्यकि के लिए महाबली बाह्लीक को कष्ट देते हुए युद्ध के मुहाने पर उसे नौ बाणों से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  7.157.12-13h 
भीमोऽथ सात्वतस्यार्थे बाह्लीकं नवभि: शरै:॥ १२॥
प्रपीडयन् महात्मानं विव्याध रणमूर्धनि।
 
 
अनुवाद
भीमसेन ने सात्यकि के लिए महाबली बाह्लीक को कष्ट देते हुए युद्ध के मुहाने पर उसे नौ बाणों से घायल कर दिया।
 
Bhimasena, while tormenting the great soul Bahlika for Satyaki, wounded him with nine arrows at the mouth of the battle. 12 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)