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mahabharat 7.157.11-12h: जब उसका पुत्र अचेत हो गया, तब बाह्लीक ने वहाँ सात्यकि पर आक्रमण किया और वर्षा ऋतु में वर्षा करने वाले बादलों के समान बाणों की वर्षा की।   |   mahabharat अध्याय 7.157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  7.157.11-12h 
व्यामोहिते तु तनये बाह्लीकस्तमुपाद्रवत्॥ ११॥
विसृजन् शरवर्षाणि कालवर्षीव तोयद:।
 
 
अनुवाद
जब उसका पुत्र अचेत हो गया, तब बाह्लीक ने वहाँ सात्यकि पर आक्रमण किया और वर्षा ऋतु में वर्षा करने वाले बादलों के समान बाणों की वर्षा की।
 
When his son fell unconscious, Bahlika attacked Satyaki there showering arrows like the clouds bringing rain during the monsoon season.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)