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mahabharat 7.156.94-95h: हे हिडिम्बपुत्र! मैं इस समय तुम पर क्रोध भी नहीं कर रहा हूँ, परन्तु यदि क्रोध करूँ, तो तुम जान लो कि क्रोध से ग्रस्त मनुष्य अपना भी नाश कर लेता है (फिर दूसरों का क्या? अतः यदि मैं क्रोध करूँ, तो तुम सुरक्षित नहीं रह सकते)।॥94 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 94-95h
 
 
श्लोक  7.156.94-95h 
कामं खलु न रोषो मे हैडिम्बे विद्यते त्वयि॥ ९४॥
किं तु रोषान्वितो जन्तुर्हन्यादात्मानमप्युत।
 
 
अनुवाद
हे हिडिम्बपुत्र! मैं इस समय तुम पर क्रोध भी नहीं कर रहा हूँ, परन्तु यदि क्रोध करूँ, तो तुम जान लो कि क्रोध से ग्रस्त मनुष्य अपना भी नाश कर लेता है (फिर दूसरों का क्या? अतः यदि मैं क्रोध करूँ, तो तुम सुरक्षित नहीं रह सकते)।॥94 1/2॥
 
O son of Hidimba, I am not even angry with you at the moment, but if I do get angry, you should know that a person overcome by anger even destroys himself (then what about others? Therefore, if I get angry, you cannot remain safe).॥ 94 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)