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mahabharat 7.156.93-94h: अश्वत्थामा ने कहा, "हे देवताओं के समान पराक्रमी पुत्र! तुम जाकर दूसरों से युद्ध करो। हे हिडिम्बपुत्र! पुत्र का अपने पिता को भी कष्ट देना उचित नहीं है।"   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 93-94h
 
 
श्लोक  7.156.93-94h 
अश्वत्थामोवाच
गच्छ वत्स सहान्यैस्त्वं युध्यस्वामरविक्रम॥ ९३॥
न हि पुत्रेण हैडिम्बे पिता न्याय्य: प्रबाधितुम्।
 
 
अनुवाद
अश्वत्थामा ने कहा, "हे देवताओं के समान पराक्रमी पुत्र! तुम जाकर दूसरों से युद्ध करो। हे हिडिम्बपुत्र! पुत्र का अपने पिता को भी कष्ट देना उचित नहीं है।"
 
Ashwatthama said, "O son, who is as valiant as the gods! You go and fight with others. O son of Hidimba! It is not right for a son to trouble his father also." 93 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)