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mahabharat 7.156.86-87h: फिर आकाश में उछलकर प्रलयकाल के मेघों के समान गर्जना करते हुए अंजनपर्वण आकाश से वृक्षों की वर्षा करने लगे। 86 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 86-87h
 
 
श्लोक  7.156.86-87h 
ततोऽन्तरिक्षमुत्प्लुत्य कालमेघ इवोन्नदन्॥ ८६॥
ववर्षाञ्जनपर्वा स द्रुमवर्षं नभस्तलात्।
 
 
अनुवाद
फिर आकाश में उछलकर प्रलयकाल के मेघों के समान गर्जना करते हुए अंजनपर्वण आकाश से वृक्षों की वर्षा करने लगे। 86 1/2॥
 
Then, jumping into the sky and roaring like the clouds of the doomsday, Anjanparvan started raining trees from the sky. 86 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)