Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.156.76-77: द्रोणपुत्र द्वारा अपने नाभि-स्थानों पर किए गए गहरे घावों से घटोत्कच अत्यंत व्यथित हुआ और उसने एक लाख तीलियों वाला चक्र हाथ में लिया। उसके अग्रभाग में चाकू लगे हुए थे। रत्नों और हीरों से सुसज्जित वह चक्र प्रातःकालीन सूर्य के समान प्रतीत हो रहा था। 76-77. | mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्रोणपुत्र द्वारा अपने नाभि-स्थानों पर किए गए गहरे घावों से घटोत्कच अत्यंत व्यथित हुआ और उसने एक लाख तीलियों वाला चक्र हाथ में लिया। उसके अग्रभाग में चाकू लगे हुए थे। रत्नों और हीरों से सुसज्जित वह चक्र प्रातःकालीन सूर्य के समान प्रतीत हो रहा था। 76-77.
Ghatotkacha was extremely distressed due to the deep wounds in his vital spots by Drona's son and he took a discus in his hand which had a lakh spokes. There were knives attached to its tip. That discus decorated with gems and diamonds looked like the morning sun. 76-77.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥