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mahabharat 7.156.72: उस समय अपने शस्त्रबल पर गर्व करने वाले द्रोण के एकमात्र अभिमानी पुत्र को तनिक भी चिन्ता नहीं हुई, उसने घटोत्कच द्वारा उत्पन्न माया को अपने बाणों से नष्ट कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  7.156.72 
तत्रैकोऽस्त्रबलश्लाघी द्रौणिर्मानी न विव्यथे।
व्यधमच्च शरैर्मायां घटोत्कचविनिर्मिताम्॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
उस समय अपने शस्त्रबल पर गर्व करने वाले द्रोण के एकमात्र अभिमानी पुत्र को तनिक भी चिन्ता नहीं हुई, उसने घटोत्कच द्वारा उत्पन्न माया को अपने बाणों से नष्ट कर दिया।
 
At that time, the only proud son of Drona who was proud of his weapon power was not at all distressed. He destroyed the illusion created by Ghatotkacha with his arrows. 72.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)