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mahabharat 7.156.69: तत्पश्चात्, संध्या से अधिक शक्तिशाली हो चुके राक्षसों द्वारा युद्धभूमि में चारों ओर पत्थरों की भारी वर्षा होने लगी।   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  7.156.69 
ततोऽश्मवृष्टिरत्यर्थमासीत् तत्र समन्तत:।
संध्याकालाधिकबलै: प्रयुक्ता राक्षसै: क्षितौ॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, संध्या से अधिक शक्तिशाली हो चुके राक्षसों द्वारा युद्धभूमि में चारों ओर पत्थरों की भारी वर्षा होने लगी।
 
Thereafter, a heavy rain of stones started falling all around the battlefield, from the demons who had become more powerful since evening. 69.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)