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mahabharat 7.156.56-57h: अश्वत्थामा को शिनि के पौत्र के रथ की ओर जाते देख भीमसेन के पुत्र घटोत्कच ने अत्यन्त क्रोधित होकर अपने शत्रु को रोक लिया। 56 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 56-57h
 
 
श्लोक  7.156.56-57h 
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य शैनेयस्य रथं प्रति॥ ५६॥
भैमसेनि: सुसंक्रुद्ध: प्रत्यमित्रमवारयत्।
 
 
अनुवाद
अश्वत्थामा को शिनि के पौत्र के रथ की ओर जाते देख भीमसेन के पुत्र घटोत्कच ने अत्यन्त क्रोधित होकर अपने शत्रु को रोक लिया। 56 1/2॥
 
Seeing Ashwatthama going towards the chariot of Shini's grandson, Ghatotkacha, son of Bhimsen, became very angry and stopped his enemy. 56 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)