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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 54-55h
 
 
श्लोक  7.156.54-55h 
चण्डवाताभिपन्नानामुदधीनामिव स्वन:॥ ५४॥
आसीद् राजन् बलौघानां तदान्योन्यमभिघ्नताम्।
 
 
अनुवाद
महाराज! उस समय उन सेना समूहों का एक-दूसरे पर आक्रमण और प्रत्युत्तर करने का शोर, प्रचण्ड वायु से विचलित होकर समुद्र की गर्जना के समान प्रतीत हो रहा था।
 
Maharaj! At that time the noise of those army groups attacking and counterattacking each other seemed like the roaring of the ocean disturbed by a strong wind. 54 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)