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mahabharat 7.156.53-54h: राजन! पुरुषसिंह भीमसेन तथा अर्जुन को द्रोणाचार्य पर आक्रमण करते देख धृष्टद्युम्न तथा महाबली सात्यकि भी वहाँ पहुँच गये। 53 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 53-54h
 
 
श्लोक  7.156.53-54h 
तौ दृष्ट्वा पुरुषव्याघ्रौ भीमसेनधनंजयौ॥ ५३॥
धृष्टद्युम्नोऽभ्ययाद् राजन् सात्यकिश्च महाबल:।
 
 
अनुवाद
राजन! पुरुषसिंह भीमसेन तथा अर्जुन को द्रोणाचार्य पर आक्रमण करते देख धृष्टद्युम्न तथा महाबली सात्यकि भी वहाँ पहुँच गये। 53 1/2॥
 
Rajan! Seeing Purusha Singh Bhimsen and Arjun attacking Dronacharya, Dhrishtadyumna and the mighty Satyaki also reached there. 53 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)