Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.156.5: तुमने मेरे उस पुत्र पर ऐसा क्रूर और विनाशकारी प्रहार क्यों किया, जिसकी भुजा अर्जुन ने काट दी थी और जिसने आमरण व्रत का व्रत लिया था?॥5॥ | mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कथं प्रायोपविष्टाय पार्थेन छिन्नबाहवे।
नृशंसं पतनीयं च तादृशं कृतवानसि॥ ५॥
अनुवाद
तुमने मेरे उस पुत्र पर ऐसा क्रूर और विनाशकारी प्रहार क्यों किया, जिसकी भुजा अर्जुन ने काट दी थी और जिसने आमरण व्रत का व्रत लिया था?॥5॥
Why did you inflict such a cruel and destructive blow on my son whose arm had been cut off by Arjuna and who had taken the vow of fasting till death?॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥