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mahabharat 7.156.45-46h: इस प्रकार महाबली द्रोणाचार्य के द्वारा मारी गई पाण्डव सेना पुनः भयभीत हो गई और सव्यसाची अर्जुन के सामने से भागने लगी।   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  7.156.45-46h 
एवं सा पाण्डवी सेना वध्यमाना महात्मना॥ ४५॥
प्रदुद्राव पुनर्भीता पश्यत: सव्यसाचिन:।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार महाबली द्रोणाचार्य के द्वारा मारी गई पाण्डव सेना पुनः भयभीत हो गई और सव्यसाची अर्जुन के सामने से भागने लगी।
 
Thus the Pandava army, being killed by the great Drona, became frightened once again and started fleeing in front of Savyasachi Arjuna. 45 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)