Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.156.42-44h: नरेश! प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी और निरंतर बाणरूपी किरणों से युक्त सूर्य के समान तेजस्वी द्रोणाचार्य को धनुष को चक्राकार घुमाकर जलते हुए प्रभाकर के समान शत्रुओं को जलाते देख पाण्डव सेना का कोई भी योद्धा उन्हें रोक न सका॥42-43 1/2॥ | mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नरेश! प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी और निरंतर बाणरूपी किरणों से युक्त सूर्य के समान तेजस्वी द्रोणाचार्य को धनुष को चक्राकार घुमाकर जलते हुए प्रभाकर के समान शत्रुओं को जलाते देख पाण्डव सेना का कोई भी योद्धा उन्हें रोक न सका॥42-43 1/2॥
Nareshwar! Seeing Dronacharya, who was as bright as blazing fire and as bright as the Sun with continuous arrow-like rays, turning his bow into a circle and burning the enemies like a burning Prabhakar, no warrior in the Pandava army could stop him. 42-43 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥