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mahabharat 7.156.41-42h: महाराज! तत्पश्चात् भारद्वाजनंदन द्रोण और पाण्डवों में पुनः युद्ध प्रारम्भ हो गया। आपके पुत्रों ने द्रोणाचार्य को चारों ओर से घेर लिया। जिस प्रकार अग्नि रुई के ढेर को जला देती है, उसी प्रकार वे पाण्डव सेना का विनाश करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  7.156.41-42h 
ततो युद्धमभूद् भूयो भारद्वाजस्य पाण्डवै:।
द्रोणस्तव सुतैै राजन् सर्वत: परिवारित:॥ ४१॥
व्यधमत् पाण्डुसैन्यानि तूलराशिमिवानल:।
 
 
अनुवाद
महाराज! तत्पश्चात् भारद्वाजनंदन द्रोण और पाण्डवों में पुनः युद्ध प्रारम्भ हो गया। आपके पुत्रों ने द्रोणाचार्य को चारों ओर से घेर लिया। जिस प्रकार अग्नि रुई के ढेर को जला देती है, उसी प्रकार वे पाण्डव सेना का विनाश करने लगे।
 
King! Thereafter, the battle between Bharadwajanandan Drona and the Pandavas began again. Your sons had surrounded Dronacharya from all sides. Just as fire burns a heap of cotton, in the same manner they started destroying the Pandava army. 41 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)