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mahabharat 7.156.32-33h: जैसे पूर्वकाल में राजा बलि ने तीनों लोकों को जीतने की इच्छा से देवताओं के साथ युद्ध किया था, उसी प्रकार द्रोणाचार्य और पाण्डवों में भी भयंकर युद्ध होने लगा ॥32 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  7.156.32-33h 
तत: प्रववृते युद्धं द्रोणस्य सह पाण्डवै:॥ ३२॥
बलेरिव सुरै: पूर्वं त्रैलोक्यजयकाङ्क्षया।
 
 
अनुवाद
जैसे पूर्वकाल में राजा बलि ने तीनों लोकों को जीतने की इच्छा से देवताओं के साथ युद्ध किया था, उसी प्रकार द्रोणाचार्य और पाण्डवों में भी भयंकर युद्ध होने लगा ॥32 1/2॥
 
Just as in the past King Bali fought a war with the gods with the desire to conquer the three worlds, similarly a fierce battle started between Dronacharya and the Pandavas. ॥ 32 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)