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mahabharat 7.156.30-31h: युयुधान के बाणों से पीड़ित और अचेत हुए सोमदत्त को देखकर द्रोणाचार्य उसे मार डालने की इच्छा से यदुवीर सात्यकि की ओर दौड़े ॥30 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  7.156.30-31h 
तं विसंज्ञं समालक्ष्य युयुधानशरार्दितम्॥ ३०॥
अभ्यद्रवत् ततो द्रोणो यदुवीरजिघांसया।
 
 
अनुवाद
युयुधान के बाणों से पीड़ित और अचेत हुए सोमदत्त को देखकर द्रोणाचार्य उसे मार डालने की इच्छा से यदुवीर सात्यकि की ओर दौड़े ॥30 1/2॥
 
Seeing Somdutta suffering from Yuyudhana's arrows and unconscious, Dronacharya ran towards Yaduveer Satyaki with the desire to kill him. 30 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)