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mahabharat 7.156.26-27h: उस समय सेनाओं के एक-दूसरे पर आक्रमण करने का शोर, तेज हवाओं से व्याकुल समुद्र की गर्जना के समान प्रतीत हो रहा था।   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  7.156.26-27h 
चण्डवाताभिसृष्टानामुदधीनामिव स्वन:॥ २६॥
आसीद् राजन् बलौघानामन्योन्यमभिनिघ्नताम्।
 
 
अनुवाद
उस समय सेनाओं के एक-दूसरे पर आक्रमण करने का शोर, तेज हवाओं से व्याकुल समुद्र की गर्जना के समान प्रतीत हो रहा था।
 
At that time the noise of the armies attacking each other seemed like the roaring of the oceans agitated by strong winds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)