Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.156.2: हे सात्वत! जिस क्षत्रिय धर्म का अनुभव महात्माओं और देवताओं ने पूर्वकाल में किया था, उसे तुम किस प्रकार त्यागकर लुटेरों के धर्म में प्रवृत्त हो गये?॥2॥ | mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्षत्रधर्म: पुरा दृष्टो यस्तु देवैर्महात्मभि:।
तं त्वं सात्वत संत्यज्य दस्युधर्मे कथं रत:॥ २॥
अनुवाद
हे सात्वत! जिस क्षत्रिय धर्म का अनुभव महात्माओं और देवताओं ने पूर्वकाल में किया था, उसे तुम किस प्रकार त्यागकर लुटेरों के धर्म में प्रवृत्त हो गये?॥2॥
Satvata! How did you abandon the Kshatriya Dharma which was experienced by the great souls and the Gods in the past and got involved in the religion of the robbers?॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥