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mahabharat 7.156.179-180: राक्षसों का वध करने के पश्चात् अश्वत्थामा ने अपने बाणों से घटोत्कच को अत्यन्त पीड़ा पहुँचाई। तब उस महाबली योद्धा ने अत्यन्त क्रोधित होकर भीमसेन और धृष्टद्युम्न सहित समस्त कुन्तीपुत्रों को अपने बाणों से घायल कर दिया तथा द्रुपदपुत्र सुरथ को भी मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 179-180
 
 
श्लोक  7.156.179-180 
निहत्य राक्षसान् बाणैर्द्रौणिर्हैडिम्बिमार्दयत्।
पुनरप्यतिसंक्रुद्ध: सवृकोदरपार्षतान्॥ १७९॥
स नाराचगणै: पार्थान् द्रौणिर्विद्‍ध्वा महाबल:।
जघान सुरथं नाम द्रुपदस्य सुतं विभु:॥ १८०॥
 
 
अनुवाद
राक्षसों का वध करने के पश्चात् अश्वत्थामा ने अपने बाणों से घटोत्कच को अत्यन्त पीड़ा पहुँचाई। तब उस महाबली योद्धा ने अत्यन्त क्रोधित होकर भीमसेन और धृष्टद्युम्न सहित समस्त कुन्तीपुत्रों को अपने बाणों से घायल कर दिया तथा द्रुपदपुत्र सुरथ को भी मार डाला।
 
After killing the demons, Ashwatthama inflicted immense pain on Ghatotkacha with his arrows. Then that mighty warrior became very angry and wounded all the sons of Kunti including Bhimasena and Dhrishtadyumna with his arrows and killed Suratha, the son of Drupada.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)