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mahabharat 7.156.173-178: अश्वत्थामा ने युद्धभूमि में रक्त की नदी बहा दी, जो रक्त के प्रवाह के कारण अत्यंत भयानक प्रतीत हो रही थी। नीचे गिरे हुए विशाल ध्वजाएँ मेंढकों के समान और युद्ध की तुरहियाँ विशाल कछुओं के समान प्रतीत हो रही थीं। राजाओं के श्वेत छत्र हंसों के झुंड की तरह नदी का आनंद ले रहे थे। पंखों के समूह झाग का भ्रम पैदा कर रहे थे। स्कंक और गिद्ध विशाल मगरमच्छों के समान लग रहे थे। वहाँ मछलियों की तरह कई प्रकार के हथियार रखे हुए थे। विशाल हाथी शिलाखंडों के समान दिखाई दे रहे थे। मृत घोड़े मगरमच्छों की तरह वहाँ फैले हुए थे। गिरे हुए रथ ऊँचे टीलों के समान लग रहे थे। ध्वजाएँ सुंदर वृक्षों के समान प्रतीत हो रही थीं। बाण मछली थे। देखने में वह बहुत भयानक था। प्रास, शक्ति और ऋष्टि आदि अस्त्र शव के साँपों के समान थे। मज्जा और मांस उस नदी में एक महान कीचड़ के समान प्रतीत हो रहे थे। तैरते हुए शव नावों का भ्रम पैदा कर रहे थे। बालों की लटों के साथ वह रंग-बिरंगी दिख रही थी। वह कायरों के लिए आकर्षक थी। वह नदी हाथियों, घोड़ों और योद्धाओं के शरीरों के नष्ट होने से प्रकट हुई थी। योद्धाओं का करुण क्रंदन ही उसकी कलकल ध्वनि थी। उस नदी से रक्त की लहरें उठ रही थीं। हिंसक पशुओं के कारण उसकी भयंकरता और भी बढ़ गई थी। वह यमराज के राज्य रूपी सागर में विलीन होने वाली थी। 173-178   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 173-178
 
 
श्लोक  7.156.173-178 
प्रवृद्धध्वजमण्डूकां भेरीविस्तीर्णकच्छपाम्।
छत्रहंसावलीजुष्टां फेनचामरमालिनीम्॥ १७३॥
कङ्कगृध्रमहाग्राहां नैकायुधझषाकुलाम्।
विस्तीर्णगजपाषाणां हताश्वमकराकुलाम्॥ १७४॥
रथक्षिप्तमहावप्रां पताकारुचिरद्रुमाम्।
शरमीनां महारौद्रां प्रासशक्त्यृष्टिडुण्डुभाम्॥ १७५॥
मज्जामांसमहापङ्कां कबन्धावर्जितोडुपाम्।
केशशैवलकल्माषां भीरूणां कश्मलावहाम्॥ १७६॥
नागेन्द्रहययोधानां शरीरव्ययसम्भवाम्।
शोणितौघमहाघोरां द्रौणि: प्रावर्तयन्नदीम्॥ १७७॥
योधार्तरवनिर्घोषां क्षतजोर्मिसमाकुलाम्।
श्वापदातिमहाघोरां यमराष्ट्रमहोदधिम्॥ १७८॥
 
 
अनुवाद
अश्वत्थामा ने युद्धभूमि में रक्त की नदी बहा दी, जो रक्त के प्रवाह के कारण अत्यंत भयानक प्रतीत हो रही थी। नीचे गिरे हुए विशाल ध्वजाएँ मेंढकों के समान और युद्ध की तुरहियाँ विशाल कछुओं के समान प्रतीत हो रही थीं। राजाओं के श्वेत छत्र हंसों के झुंड की तरह नदी का आनंद ले रहे थे। पंखों के समूह झाग का भ्रम पैदा कर रहे थे। स्कंक और गिद्ध विशाल मगरमच्छों के समान लग रहे थे। वहाँ मछलियों की तरह कई प्रकार के हथियार रखे हुए थे। विशाल हाथी शिलाखंडों के समान दिखाई दे रहे थे। मृत घोड़े मगरमच्छों की तरह वहाँ फैले हुए थे। गिरे हुए रथ ऊँचे टीलों के समान लग रहे थे। ध्वजाएँ सुंदर वृक्षों के समान प्रतीत हो रही थीं। बाण मछली थे। देखने में वह बहुत भयानक था। प्रास, शक्ति और ऋष्टि आदि अस्त्र शव के साँपों के समान थे। मज्जा और मांस उस नदी में एक महान कीचड़ के समान प्रतीत हो रहे थे। तैरते हुए शव नावों का भ्रम पैदा कर रहे थे। बालों की लटों के साथ वह रंग-बिरंगी दिख रही थी। वह कायरों के लिए आकर्षक थी। वह नदी हाथियों, घोड़ों और योद्धाओं के शरीरों के नष्ट होने से प्रकट हुई थी। योद्धाओं का करुण क्रंदन ही उसकी कलकल ध्वनि थी। उस नदी से रक्त की लहरें उठ रही थीं। हिंसक पशुओं के कारण उसकी भयंकरता और भी बढ़ गई थी। वह यमराज के राज्य रूपी सागर में विलीन होने वाली थी। 173-178
 
Ashwatthama unleashed a river of blood in the battlefield, which appeared extremely terrifying due to the flow of blood. The huge flags that had fallen down looked like frogs and the war trumpets looked like huge turtles. The white umbrellas of the kings enjoyed the river like a flock of swans. The groups of fans created the illusion of foam. The skunks and vultures looked like huge crocodiles. Many types of weapons were found there like fish. Huge elephants appeared like boulders. Dead horses were spread there like crocodiles. The fallen chariots looked like high mounds. The flags appeared like beautiful trees. The arrows were fish. It was very terrifying to look at. The weapons like Pras, Shakti and Rishti were like the snakes of a corpse. The marrow and flesh appeared like a great mud in that river. The floating corpses created the illusion of boats. It was looking colourful with the locks of hair. It was tempting for the cowards. That river was manifested due to the destruction of the bodies of elephants, horses and warriors. The wailing cries of warriors were its gurgling sound. Waves of blood were rising from that river. Its dreadfulness had increased even more due to the ferocious animals. It was going to merge into the ocean of the kingdom of Yamraj. 173-178.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)