Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.156.171: हाथियों की सूंडें कटी हुई थीं और वे इधर-उधर छटपटा रही थीं। उनसे ढकी हुई धरती ऐसी लग रही थी मानो रेंगते हुए साँपों से ढकी हो। (171)   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 171
 
 
श्लोक  7.156.171 
निकृत्तैर्हस्तिहस्तैश्च विचलद्भिरितस्तत:।
रराज वसुधा कीर्णा विसर्पद्भिरिवोरगै:॥ १७१॥
 
 
अनुवाद
हाथियों की सूंडें कटी हुई थीं और वे इधर-उधर छटपटा रही थीं। उनसे ढकी हुई धरती ऐसी लग रही थी मानो रेंगते हुए साँपों से ढकी हो। (171)
 
The elephants' trunks were cut off and were writhing here and there. The earth covered by them looked as if it was covered with crawling snakes. 171.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)