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mahabharat 7.156.168: उन्होंने पलक झपकते ही अपने तीखे बाणों से घोड़ों, सारथि, रथियों और हाथियों सहित राक्षसों की पूरी सेना को नष्ट कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 168
 
 
श्लोक  7.156.168 
निमेषान्तरमात्रेण साश्वसूतरथद्विपाम्।
अक्षौहिणीं राक्षसानां शितैर्बाणैरशातयत्॥ १६८॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने पलक झपकते ही अपने तीखे बाणों से घोड़ों, सारथि, रथियों और हाथियों सहित राक्षसों की पूरी सेना को नष्ट कर दिया।
 
In the blink of an eye he destroyed with his sharp arrows an entire army of demons, including their horses, charioteers, chariots and elephants. 168.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)